बच्चो को पैसो का महत्व कैसे समझाएं?

Financial Management For Kids In Hindi

नमश्कार दोस्तों मैं हूँ Shubham आप सभी का स्वागत करता हूँ इस Blog पर और हमेशा की तरह एक नए Article के साथ आपके लिए हाजिर हूँ। ‘Financial Management In Hindi’ दोस्तों अक्सर हम लोगो से सुनते है की छोटे बच्चो को हमारी Financial Situation के हिसाबसे जीना सीखना बहुत कठिन काम है।

जी हाँ यह बिलकुल सच है लेकिन कई न कई इसमें हमारी भी गलती होती है। क्योकि हम उस चीज में कम पड़ जाते है, क्योकि बच्चे जब छोटे रहते है तभी इन सब चीजों का आकलन हमको करना चाहिए और बचपन से ही उनको खर्चे की आदत के बतौर कमाने की आदत हमको डलवानी चाहिए।



इससे यह लाभ होगा की आप निश्चिन्त रहेंगे और दुसरा आपके बच्चे विशिष्ट उम्र में ही व्यवहार करना सिख जायेंगे। इन सब बातो का आकलन मैंने Dhan Ka Nivesh Kaise Karein इस Book के माध्यम से किया है। तो चलिए कुछ रोचक बाते जो मैंने इस Book से सीखी है जो आपको भी बताता हूँ।

  1. Financial Management (Hindi)
  2. Rich Dad Poor Dad (Hindi)

बच्चो की जिद को पूरा करना मानता हूँ की हमारा कर्तव्य है लेकिन हद्द से ज्यादा उनकी जिद्द को बढ़ावा देते हुए उसे पूरा करना उतना ही भयानक साबित हो सकता है जितना की छोटे पौधे को हद्द से ज्यादा पानी देकर मार देना।

जब बच्चे अक्सर खिलौने, इलेक्ट्रॉनिक्स चीजे, डॉल्स, स्टाइलिश घडिया ऐसी चीजों की जब मांग करते है उस समय अक्सर आप उनकी मांग पूरी करने के समर्थन में नहीं होते।

अगर ऐसे हालात में अगर आप भी इन सब चीजों का सामना कर घर चला रहे हो तो आपके बच्चो को Financial Management सीखाना और उसे उनके जीवन से रूबरू करवाना बेहद जरुरी है, ताकि वह भी आपकी Financial Situation समझ सके।

बेशक, इस बात का फायदा आपके बच्चो को साथ ही आपको Life time मिलेगा।




बच्चो को पैसे की बचत के बारे में बताना और उनसे यह करवाना दोनों अलग बाते है। जैसे आजकल देखने को मिलता है की बच्चे Brand के जाल में फसे हुए है उनको हर चीज Branded ही चाहिए।

चाहे वो Mobile ‘iPhone’ हो, कपडे हो, या फिर Gadgets हो। उनको हर चीज Brand के रूप में चाहिए लेकिन महंगे Branded चीजे Use करने के लिए उतना ही ज्यादा पैसा चाहिए जितना की किसान को खेत चलाने में लगता हो।

क्योकि अक्सर हम अपनी औकात से बहार जाकर अपने शान और शौकत बढ़ाने की सोचते है और इसी चक्कर में हम अक्सर Bankrupt हो जाते है।



मैं यहाँ ये नहीं कह रहा हूँ की Life Style Important नहीं है, Important है लेकिन उसी के साथ अपने अन्य खर्चो पर नजर डालना उतना ही जरुरी है जितना की चाय में शक्खर जरुरी है।

लेकिन अक्सर हम इन सब बातो पर ज्यादा गौर नहीं करते और Life के पड़ाव में इन सब बातो को भूल जाते है और बच्चो को Financial Management से Aware करने के बजाय उनके हर एक शौक पुरे करवाते है जो अपने औकात से भी बहार है।

जैसे आजकल 12 से 15000 कमाने वाला व्यक्ति भी 50,000 का मोबाइल Use करने की सोचता है। लोग Liabilities और Asset इन बातो को ठीक से समझ नहीं पाते है और Rat Race की दौड़ Life Time लगाते रहते है।




  • इन सभी कारणों से बच्चो के लिए धन की बचत से जुडी आदत डालना और भी मुश्किल होने लगा है, जिसमे ये सुझाव माता-पिता की खासी मदद कर सकते है। जिसे मैं इस Book के माध्यम से आपके सामने रखने की कोशिश कर रहा हूँ।

 

  • एक बहुत ही साधारण सी बात है, हमें पैसे क्यों चाहिये और क्यों चाहिए या फिर पैसे से क्या खरीदा जा सकता है और क्या नहीं, इसे बच्चों को अच्छी तरह समझाएं।

 

  • बच्चों को जेब खर्च का कुछ हिस्सा हर बार बचाने के लिए कहें।

 

  • छोटे बच्चो को कर्षक पिग्गी बैंक या गुल्लक लेकर दें, यह एक अच्छी और असरदार शुरुआत होगी।

 

  • बच्चे अक्सर बड़ों की नक़ल करते है। अगर आप खुद रूपए खर्च करने के मामले में काफी ढीला हाथ रखते है, तो बच्चे कैसे अपने खर्चो की लगाम कस पाएंगे। अतः आप खुद उनके सामने धन की बचत का Example पेश करें भले माता-पिता यह महसूस करें या नहीं, बच्चो को धन को लेकर आदते माता-पिता से ही विरासत में आती है। माता-पिता किस तरह पैसे खर्च करते है, उधार लेते है, बचत करते है बाटते है, निवेश करते है या धन को सुरक्षित रखते है, यह सब बच्चों द्वारा देखा व सीखा जाता है।





दरअसल बच्चो को यह पाठ पढाना जरुरी है की उनकी जरुरत और चाहत क्या है। कई बार बड़े भी प्यार और लापरवाही से बच्चों के लिए वे सभी चीजे खरीद लेते है, जिनकी वे फरमाइश करते है।

कभी-कभी उन्हें बतौर तोहफा, पुरस्कार या किसी ख़ास मौके पर बच्चो को खाने-पिने या पैसो को देकर उनकी आदत भी बड़े ही बिगाड़ते है। बच्चो को छोटी उम्र से ही यह पाठ पढ़ाना शुरू कर दें की हम जो चाहते है, वो सबकुछ ख़रीदा नहीं जा सकता। 

हमे आपसी जरूरतों और जरुरी चीजों में चुनाव करना पड़ता है, प्राथमिकताएं तय करनी पड़ती है।  इसके अलावा उन्हें इन बातों की सिख दे:

  • बच्चो को अपनी हर इच्छा को पूरा करने के लिए इंतज़ार करना सिखाइए।

 

  • बच्चो को लघु बचत और दीर्घ कालीन बचत के बारें में बताएं।

 

  • बच्चो को इनाम के तौर पर पैसे या फिर खाने पिने की चीजे न दे।

 

  • बच्चो को कुछ इस तरह समझाएं की टीवी बंद करके होमवर्क करने पर उन्हें ही खेलने के लिए ज्यादा समय मिलेगा, न की दस रूपए का नोट या चोकलेट।




 

  • इसी तरह डिस्क की बजाय उन्हें अच्छी पुस्तके खरीदने और उच्च शिक्षा के लिए बचत का पाठ पढ़ाएं।

 

  • बच्चों को अपने साथ बैंक ले जाना, वहाँ उनका खाता खुलवाना और उन्हें इस बारे में शिक्षित करना फायदेमंद रहेगा।

 

  • उन्हें अपने साथ बैंक वगैरह लेकर जाएं। इससे भी उन्हें पैसो की अहमियत का पता चलेगा।


अपनी जरूरतों और Financial Management के बारे में कभी कभी बच्चो से बात जरूर करें। आपके बच्चो को भी पता होना चाहिए की आपकी भी कई ख्वाहिशे है।

जिन्हे आप सिमित पैसो के चलते पूरा नहीं कर पाते हैं और धन को खर्च करने के मामले में आपकी भी कोई सीमा है।

इसी गरमजोशी के साथ मैं मेरी कलम को यही रोखता हूँ। उम्मीद है आपको यह Article पसंद आया होगा। जो भी मैंने Dhan Ka Nivesh Kaise Karein इस book के माध्यम से पढा उसे आपके सामने अच्छी तरहसे रखने की कोशिश की है।




इसी बात पर अमल करते हुए मिलते है अगले Article में तब तक के लिए मुझे दीजिये इजाजत और इतने देर से मेरे साथ बने रहने के लिए आप सब का तहे दिल से धन्यवाद और आपके Contact Circle में अगर आपको लगता है,

की यह सब बातों की जरुरत किसी को है तो जरूर उसे इन सब बातों से Share कर के रूबरू करवाए। आपका फिर से एक बार तहे दिलसे शुक्रिया धन्यवाद।

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