Don’t Is Do

Don't is do लक्ष्य

नमश्कार दोस्तों मैं हूँ Shubham आप सभी का स्वागत करता हूँ इस Blog पर और हमेशा की तरह नए Article के साथ आपके लिए हाजिर हूँ। काफी समय बाद आज Article लिखने का मौक़ा मिला, थोड़ी देरी होने के लिए क्षमा चाहता हूँ। तो चलिए इसी गरमजोशी के साथ आगे बढ़ते हुए आज के नए Topic की शुरुआत करते है।

“Don’t Is Do” इसे हिंदी में समझाना चाहूँ तो कुछ ऐसा आएगा…..


“Don’t Is Do”


“जो करना नहीं है वही करना है”

जब मैंने यह अपने व्हाट्सअप स्टेटस पर शेयर किया तब बहुत सारे लोगो को confusion हुआ, किसीने पूछ लिया तो किसी ने नहीं पूछा की इसका अर्थ क्या है। जिन्होंने पूछा उनको तो पता चल गया लेकिन बाकी के लोग अटके रहे। इसी बात को ध्यान में रखते हुए सोचा की क्यों ना इसको विस्तारित रूप से आपके सामने विस्तृत करने का प्रयास किया जाए।

इस दुनिया में हर एक आदमी अपने अपने हिसाबसे जीने की चेष्ठा करता है और वह काफी हद्द तक सही भी है। लेकिन इस जीवन यात्रा में हम अपने आपको भूल जाते है और लोगो के बारे में ज्यादा सोचते है।

इसीलिए मैंने कहाँ की Don’t is do. जाहिर सी बात है की अगर आप किसी काम को करने की सोचते भी है तो बहुत सारे लोग आपको रोख लगाने में कामियाब हो जाते है। तनिक इसका आपसे कोई लेना देना नहीं रहता फिर भी जान बुझ कर बाधा डालना लोगो का स्वाभाव है।

इतिहास साक्षी है। लोगो ने प्रभु श्री राम को नहीं छोड़ा, सीता मैया को नहीं छोड़ा, प्रभु श्री कृष्ण को नहीं छोड़ा तो हम किस खेत की मूली है? ऐसा प्रश्न जब मेरे मन में उठता है तब मुझे ऐसा लगता है की किसी अच्छे काम में अगर कोई बाधा डालने की चेष्ठा करता है तो उस मुर्ख इंसान की बातो को ज्यादा गंभीरता से ना लेकर उसे वही छोड़ देना चाहिए और जीवन में आगे बढ़ जाना चाहिए।

यानी बात का तात्पर्य यही होता है की “जिस काम को करने के लिए लोग आपको रोखते है वही काम आपको पहले करना है” तनिक आप आपका लक्ष्य साध सको और अपने जीवन में बिना किसी बाधा के आगे बढ़ सको।

आप चाहे कितना भी प्रयास करले लोग आपको तरह-तरह की बातो में उलझाना कभी नहीं छोड़ेंगे और वे आपका मनोबल कमजोर करने में कामियाब हो जायेंगे। वही दूसरी तरफ अगर आप उनकी बातो से अचंभित ना होकर एवं लज्जित ना होकर अपने लक्ष्य प्राप्ति के लिए निरंतर प्रयास करते रहेंगे और अगर आप कामियाब हो जायेंगे तो वही लोग आपको शाबाशी लगाने की चेष्ठा भी करेंगे।

यानी कुल मिला कर बात ऐसी होती है की आपको केवल अपने लक्ष्य के लिए जीना है और जो लोग हमको किसी काम को करने के लिए मना करते है जब कि हम अपने हिसाब से सही भी है फिर भी वह मना कर रहे है तो उसी काम को कर लेने में ही आपकी भलाई है।

इसी बात को समझाने का प्रयास मेरा सफल हुआ है ऐसा मैं मान के चलता हूँ। अगर कोई सवाल हो इसी बात से सम्बंधित तो मुझे comment कर के पूछ सकते है। और अगर article पसंद आया हो तो शेयर करना ना भूलियेगा, धन्यवाद।

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